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सूर्यग्रहण मध्ये कसे राहावे काय करू नये काय करावे ?

सूर्यग्रहण उद्या सकाळी 8 वाजुन 17 मिनिटांनी सुरवात होणार असून 10 वाजून 57 मिमिटपर्यंत आहे । हे सूर्यग्रहण धनु राशी म्हद्ये होणाऱ्या सप्त ग्रहांचा समावेश असल्याने अतिशय नकारात्मक ऊर्जेचा प्रभाव सर्वत्र टाकणार आहे यामुळे या वेळेत कुठलेही पुण्यकर्म शुभकर्म प्रणय अंघोळ भोजन भ्रमण प्रवास इत्यादी वर्ज्य करावा  गर्भवती महिलांनी या काळात घराच्या बाहेर न निघता कुठलीही क्रिया करू नये सिद्धासनात बसून ईश्वरा चे मनन करावे (दिवा लावणे देवपूजा करणे वर्ज्य ) । या सूर्यग्रहचा सुतक काळ आज संध्याकाळी 8 वाजुन 17 मिनिटांनी सुरवात होणार आहे सुतक काळात वरील सर्व गोष्टी वर्ज करावेच पण जमल्यास जास्तीतजास्त ईश्वराचे नाम घ्यावे शिळे भोजन वर्ज्य करावे मोकळ्या हवेत जाणे वर्ज्य मद्यपान वर्ज्य व्यर्थ गप्पा वर्ज्य आहेत यांनी अतिशय नुकसान होऊ शकते । काळजी घ्यावी । जय श्रीचक्रधर दंडवत प्रणाम । अधिक माहिती संपर्क करा - Astrology can Help you as navigation for future path of life. We had started Online Consultation  Just Download App and Register You will get free Horoscope and  You will get  100 Rs gi...

त्याग

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_त्याग !!_ _एक बार दो आदमी एक मंदिर के पास बैठे गपशप कर रहे थे । वहां अंधेरा छा रहा था और बादल मंडरा रहे थे ।_ _थोड़ी देर में वहां एक आदमी आया और वो भी उन दोनों के साथ बैठकर गपशप करने लगा ।_ _कुछ देर बाद वो आदमी बोला उसे बहुत भूख लग रही है, उन दोनों को भी भूख लगने लगी थी । पहला आदमी बोला मेरे पास 3 रोटी हैं, दूसरा बोला मेरे पास 5 रोटी हैं, हम तीनों मिल बांट कर खा लेते हैं।_ _उसके बाद सवाल आया कि 8 (3+5) रोटी तीन आदमियों में कैसे बांट पाएंगे ??_ _पहले आदमी ने राय दी कि ऐसा करते हैं कि हर रोटी के 3 टुकडे करते हैं, अर्थात 8 रोटी के 24 टुकडे (8 X 3 = 24) हो जाएंगे और हम तीनों में 8 - 8 टुकड़े बराबर बराबर बंट जाएंगे।_ _तीनों को उसकी राय अच्छी लगी और 8 रोटी के 24 टुकडे करके प्रत्येक ने 8 - 8 रोटी के टुकड़े खाकर भूख शांत की और फिर बारिश के कारण मंदिर के प्रांगण में ही सो गए ।_ _सुबह उठने पर तीसरे आदमी ने उनके उपकार के लिए दोनों को धन्यवाद दिया और प्रेम से 8 रोटी के टुकड़ों के बदले दोनों को उपहार स्वरूप 8 सोने की गिन्नी देकर अपने घर की ओर चला गया ।_ _उसके जाने के बाद दूसरे आदमी ने...

हतोड़ा नही चाबी बने ....

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हथौड़ा नही चाबी बन जाओ किसी गाँव में एक ताले की दुकान थी,ताले वाला रोजाना अनेकों ताले तोडा करता और अनेकों चाबियाँ भी बनाया करता था। ताले वाले की दुकान में एक बच्चा भी रोज काम सीखने आया करता था। बच्चा रोज देखा करता कि छोटी सी चाबी इतने मजबूत ताले को भी कितनी आसानी से खोल देती है। एक दिन बच्चे ने ताले वाले से पूछा कि हथौड़ा ज्यादा शक्तिशाली है और हथौड़े के अंदर लोहा भी ज्यादा है और आकार में भी चाबी से बड़ा है लेकिन फिर भी हथौड़े से ताला तोड़ने में बहुत समय लगता है और इतनी छोटी चाबी बड़ी ही आसानी से मजबूत ताला कैसे खोल देती है । दूकानदार ने मुस्कुरा के बच्चे से कहा कि हथौड़े से तुम ताले पर ऊपर से प्रहार करते हो और उसे तोड़ने की कोशिश करते हो लेकिन चाबी ताले के अंदर तक जाती है, उसके अंतर्मन को छूती है और घूमकर ताले के अंतर्मन को बिना चोट किए स्पर्श करती है और ताला खुल जाया करता है। वाह! कितनी गूढ़ बात कही है। इसी प्रकार आप चाहे कितने भी शक्तिशाली हो ताकतवर हो, लेकिन जब तक आप लोगों के दिल में नहीं उतरेंगे, उनके अंतर्मन को नहीं छुएंगे तब तक कोई आपकी इज...